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Sunday, May 31, 2009

ये कौन चित्रकार है? एक और अद्भुत जीव


13 जुलाई, 2008 को रायपुर से प्रकाशित होने वाले दैनिक छत्तीसगढ की ओर से यह चित्र मुझे भेजा गया इसके विषय मे जानने के लिये। मैने तो उन्हे जवाब भेज दिया जिसे उन्होने अपने अखबार मे प्रकाशित कर दिया।


आप यदि इस विषय मे जानते हो तो बताये।


मैने ये जानकारी भेजी।


"यह एटलस मोथ है जिसका वैज्ञानिक नाम एट्टाकस एटलस है। इसे विश्व का सबसे बडा मोथ कीट माना जाता है जिसके पंखो का पृष्ठ क्षेत्र 65 वर्ग इंच होता है। पंखो का फैलाव 10-12 इंच का होता है। भारत मे गैर-व्यवसायिक स्तर पर इसे पाला जाता है रेशम के लिये। इससे प्राप्त रेशम को फगारा रेशम कहा जाता है। इससे रेशम टूटे रेशो के रुप मे निकलता है। यह टिकाऊ होता है। ताइवान मे इसके कोकून का प्रयोग पर्स के रुप मे होता है। इसकी मादा एक विशेष प्रकार की गन्ध उत्सर्जित करती है जिसकी गन्ध से नर मीलो दूरी से खीचे चले आते है। नर तक गन्ध पहुँचे इसलिये वे ऐसी शाखाओ मे बैठती है जहाँ हवा तेज गति से बह रही होती है।"


© सर्वाधिकार सुरक्षित

Saturday, May 30, 2009

यह रही उस अजीबोगरीब जीव के बारे मे जानकारी

कल की पोस्ट मे दिख रहे अजीबोगरीब जीव के बारे मे तकनीकी जानकारी यह रही

"यह बेलास्टोमेटिड नर कीट है जो कि मादा द्वारा दिये गये अंडो को अपनी पीठ पर रखे हुये है। इन अंडो की देखरेख नर ही करेगा और मादा इसमे सहयोग करेगी। चित्र मे कीट के अग्र भाग पर जो छोटे लाल मकोडे दिख रहे है वे परजीवी है, नर के लिये भी और अंडो के लिये भी। "

Friday, May 29, 2009

क्या आपने ऐसा अजीबोगरीब जीव देखा है पहले?


16 सितम्बर, 2008 को रायपुर से प्रकाशित होने वाले दैनिक छत्तीसगढ की ओर से यह चित्र मुझे भेजा गया इसके विषय मे जानने के लिये। मैने तो उन्हे जवाब भेज दिया जिसे उन्होने अपने अखबार मे प्रकाशित कर दिया। आपको जवाब बताने से पहले मै आपके विचार भी जान लूँ।

Tuesday, November 4, 2008

रतनजोत के बीज खाकर 5 बच्चे मरे

यह दुखद समाचार कुछ पलो पहले प्राप्त हुआ। बेहद दुखद।


http://www.sindhtoday.net/south-asia/33346.htm


उम्मीद है अब सरकार जागेगी और स्कूलो मे जहरीले रतनजोत को जानबूझकर लगवाने वालो पर कानूनी कार्यवाही करेगी। मौत के सौदागर है ये।


कुछ वर्षो पहले लिखे गये इस चेतावनी भरे लेख मे जतायी गयी आशंकाए अब सही साबित हो रही है।


http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=847&page=-2

Monday, November 3, 2008

अब जान ही ले सब कुछ जहरीले रतनजोत के बारे मे

कल की कविता पर आपकी प्रतिक्रियाओ के लिये आभार। पाठको ने जहरीले विदेशी पौधे रतनजोत के बारे मे विस्तार से जानना चाहा है। पिछले कुछ वर्षो मे इसके दुष्प्रभावो पर लिखे गये अंग्रेजी और हिन्दी लेखो की सूची यहाँ संलग्न है। आज ही मै चार वर्षीय बालक रिपुसूदन से मिलकर लौटा हूँ जिसने रतनजोत खा लिया था। उसकी दिमागी हालत पन्द्रह दिनो बाद भी ठीक नही हुयी है। कुछ पाठको ने लिखा है कि हाँ नयी तकनीक के अपने खतरे तो हैं .पर धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा ! इसमें कलाम साहब का क्या दोष ? और ऐसा ही कुछ -----

मै यही सोच रहा हूँ कि काश! ये कुतर्क सैकडो प्रभावित बच्चो की मुसीबत कुछ कम कर पाते। आज यदि हम किसी व्यक्ति को जिम्मेदारी से बचायेंगे तो कल इसी आड पर दूसरे भी वही गल्ती करेंगे। आखिर कब तक हमारा देश इन अधपके दिमागो की योजनाओ का बोझ उठाता रहेगा???

Bare facts about poisonous Jatropha curcas.

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=877&page=-2


Celebrate Deepawali this year with Karanj oil lamps.

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=1595&page=-2


Jatropha fever.

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=879&page=-2


Keep your water sources pure through traditional knowledge about herbs.

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=952&page=-2

Let’s come forward to save wildlife from poisonous Jatropha.

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3099&page=-2

New observations related to Jatropha failure in India.

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3097&page=-2

Now Jatropha is showing its (bad) colors in India.

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3078&page=-2

One day in Barnawapara wildlife sanctuary region with new experiences
and observations.

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3102&page=-2

Planning of FEW, Problems for generations

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=843&page=-2

Status of Jatropha curcas in year 2022 in India.

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3082&page=-2

That is why common people oppose Jatropha plantation.

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=1868&page=-2

Thats why your Biodiesel Tree is not performing well.

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3118&page=-2

Visit to plantations and see Jatropha failure by your own eyes.

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3081&page=-2

Who will protect our children from Jatropha poisoning?

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=847&page=-2

Why Karanj is better than Jatropha?

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=845&page=-2

Who will buy Ratanjot?

http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557008

Recommended for wasteland why Jatropha is under planting in fertile
crop fields?

http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557108

Why there is blind race for foreign plant Jatropha?

http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557411

Jatropha promoters know very less about this foreign plant.

http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557412

Why indigenous Karanj is better than exotic Jatropha?

http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557413

Karanj vs. Jatropha : Indigenous vs. Exotic

http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557422

Harmful effects of Jatropha and its large scale plantation are now
coming on surface.

http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557681

Thursday, July 3, 2008

आखिर कब तक होती रहेगी भारतीय सम्पदा की चोरी इस तरह?

आखिर कब तक होती रहेगी भारतीय सम्पदा की चोरी इस तरह?

- पंकज अवधिया

कल ही मुझे एक भारतीय वैज्ञानिक का सन्देश मिला जिसमे संकट मे पडे दो विदेशी वैज्ञानिको को बचाने आन-लाइन याचिका पर हस्ताक्षर करने की अपील की गयी थी। इस सन्देश मे कहा गया था दोनो विदेशी वैज्ञानिको ने भारतीय कानून तोडा है पर चूँकि उनका विश्व मे बहुत नाम है इसलिये उन्हे छोड दिया जाना चाहिये। मैने इंटरनेट पर खोजा तो घटना की जानकारी मिली। घटना दार्जिलिंग के पास की है जहाँ इसी साल जून के अंतिम सप्ताह मे चेक गणराज्य के दो नागरिक राष्ट्रीय वन्यप्राणी अभ्यारण्य मे बिना अनुमति के सैकडो कीडो के साथ पकडाये। वन विभाग ने वन्यप्राणी सुरक्षा अधिनियम के तहत उन पर कार्यवाही की और न्यायालय ने उन्हे जमानत देने से इंकार कर दिया। अब अगले सप्ताह इसकी सुनवाई होगी। यह भी जानकारी मिली कि इनके पास टाइगर बीटल नामक विशेष आर्थिक महत्व के कीट पाये गये जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार विशेषकर चीन मे बहुत माँग है। एक कीट की कीमत हजारो मे है। जिस भारतीय वैज्ञानिक ने अपील भेजी थी उसका तर्क था कि इन लोगो ने अपने म्यूजियम के लिये इसे एकत्र किया होगा। इतने बडे वैज्ञानिक व्यापार के लिये ऐसा नही कर सकते।

पूरा लेख इस कडी पर पढे

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3180&page=12370

Wednesday, May 28, 2008

आइये बचाये, भगवान की इस निरीह बुढिया को

भगवान की बुढिया के विषय मे आज रोचक लेख आप ज्ञान जी के चिठ्ठे मे पढ सकते है।

http://hgdp.blogspot.com/2008/05/blog-post_28.html

Tuesday, May 20, 2008

वनस्पतियो के साधारण प्रयोग से बचे मच्छरो से

आज ज्ञान जी के चिठ्ठे पर आप इस विषय मे उपयोगी जानकारी प्राप्त कर सकते है। इस कडी को चटकाए

http://hgdp.blogspot.com/2008/05/blog-post_21.html

नंगे होते पहाड, प्रकृति का उजडता संसार

यह हिन्दी लेख इकोपोर्ट मे पीडीएफ के रुप मे उपलब्ध है। यह देश भर मे प्रकाशित हो चुका है। आप इस कडी पर जाकर इस लेख को पढ सकते है।

http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557435

Monday, May 19, 2008

अतिथि देवो भव: : वर्तमान परिपेक्ष्य मे कितना प्रासंगिक?

यह हिन्दी लेख देश भर मे छप चुका है। मनुज फीचर्स के सौजन्य से भी। आप इकोपोर्ट मे इसे पढ सकते है। यह पीडीएफ मे है। आप इस कडी पर जाकर डाउनलोड कर सकते है।

http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557477

Saturday, May 17, 2008

छै घंटे मे औसतन 1000 पन्ने लिख पाने का अनुभव

छै घंटे मे औसतन 1000 पन्ने लिख पाने का अनुभव निश्चित ही अनोखा है। पिछले कुछ समय से मै प्रतिदिन यही कर रहा हूँ। मधुमेह और ह्रदय रोगो की वैज्ञानिक रपटो पर काम चल रहा है। मधुमेह की रपट मे 75,000 से अधिक और ह्रदय रोगो की रपट मे अब 20 हजार से अधिक पन्ने लिखे जा चुके है। पिछले कुछ दिनो मे किये गये कार्यो के अंश आप इन कडियो मे देख सकते है।

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Keyword=heart1&KeywordWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Keyword=heart2&KeywordWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Keyword=heart3&KeywordWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Keyword=heart4&KeywordWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Keyword=heart5&KeywordWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Keyword=heart6&KeywordWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Title=Traditional+Shurbut+%28Sherbet%29+based+365+days+schedule+%28III%29&KeywordWild=CO&TitleWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Title=Traditional+Shurbut+%28Sherbet%29+based+365+days+schedule+%28IV%29&KeywordWild=CO&TitleWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Title=Traditional+Shurbut+%28Sherbet%29+based+365+days+schedule+%28V%29&KeywordWild=CO&TitleWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Title=Traditional+Shurbut+%28Sherbet%29+based+365+days+schedule+%28VI%29&KeywordWild=CO&TitleWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Title=Traditional+Shurbut+%28Sherbet%29+based+365+days+schedule+%28VII%29&KeywordWild=CO&TitleWild=CO


यदि एक पन्ने की टाइपिंग का बाजार भाव पाँच रुपये भी पकडे तो रोज पाँच हजार रुपयो का काम हो जाता है। फिर बाजार मे शायद की कोई रोज एक हजार पन्ने कर पाये बिन गल्ती के। ये सारे काम अपनी जेब से हो रहे है इसलिये बाहरी मदद की तो सोच भी नही सकते।

इतना अधिक लिखने के कारण शरीर पर कुछ बुरे प्रभाव भी हो रहे है। आँखो पर सबसे अधिक असर है। दोनो आँखो के चारो ओर काले चक्र बन जाते है। नीन्द मे भी यह लेखन चलता रहता है। इसलिये लम्बी नीन्द के बाद भी थकान बनी रहती है। शाम को दो घंटे खेलने चला जाता हूँ इसलिये तन और मन तरोताजा हो जाते है।

पहले मै दो से तीन पन्ने ही एक दिन मे लिख पाता था पर वर्तमान गति को पाने मे तीन साल लगे। आगे का लक्ष्य है एक दिन मे 10,000 पन्ने लिखना , कम से कम बीस दिनो तक। इन दोनो रपटो मे इतनी सारी जानकारियाँ है कि इन्हे पूरा करने के लिये यह गति जरुरी है। कभी आप भी प्रयास करियेगा इस गति से लिख पाने का।



आप यह भी पढ ले

http://dardhindustani.blogspot.com/2008/05/blog-post_17.html



For further updates on report, keep visiting this link



Note on Scientific Report titled ‘Traditional medicinal knowledge about herbs and herbal combinations used in treatment of Type II Diabetes in India with special reference to Chhattisgarh’.
by
Pankaj Oudhia

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3077&page=-2






Tuesday, May 6, 2008

भारतीय सैन्य अभियानो के लिये उपयोगी वनस्पतियाँ

आज युद्ध मे प्रयोग होने वाली वनस्पतियो के विषय मे पढे ज्ञान जी के चिठ्ठे मे

http://hgdp.blogspot.com/2008/05/blog-post_07.html

Saturday, April 26, 2008

इकोपोर्ट मे मेरा अब तक का योगदान

पिछले दिनो कुछ प्रबुद्ध पाठको ने इकोपोर्ट मे मेरे योगदान की जानकारी चाही थी। वैसे तो मै अपने लेखो मे कडियाँ देता रहता हूँ पर एक बार फिर से यहाँ कुछ उपयोगी कडियाँ प्रस्तुत है। पिछले माह एक कम्प्यूटर विशेषज्ञ को फीस देकर प्रिंट निकलवाने के लिये कुल पन्नो की संख्या गिनने का प्रयास किया था पर तीन लाख पन्नो के बाद इसे रोक दिया गया। यदि एक पन्ने के लिये एक रुपया भी पकडे तो भी तीन लाख से अधिक का खर्च बैठेगा। शोध आलेखो और रपट की सूची मे मधुमेह की वैज्ञानिक रपट भी है जिसमे अभी तक 75,000 पन्ने जोडे जा चुके है। यह दो वर्षो मे पूर्ण होगी और तब इसमे दो लाख से अधिक पन्ने होंगे। हाल ही मे ह्र्दय रोगो पर भी एक रपट आरम्भ की है। इसमे अभी तक दस हजार पन्ने लिखे गये है। प्रतिदिन 600-800 पन्ने का कठिन लक्षय रखा है। इकोपोर्ट विकी की तरह है। इसमे पैसा नही मिलता। शोध से लेकर दस्तावेजीकरण तक किसी से भी एक पैसा लिये बगैर ये योगदान दिया गया है। विकी के विपरीत इसमे विशेषज्ञ ही अपना योगदान दे सकते है। इकोपोर्ट ज्ञान के व्यवसायिक उपयोग की अनुमति नही देता। इकोपोर्ट मे रपट को कूट भाषा मे भी लिखा जा सकता है। इकोपोर्ट मे मैने 80,000 से अधिक चित्रो का योगदान किया है जिसमे से अब तक 32,000 से अधिक चित्र शामिल किये जा चुके है।

इसके अलावा 13,000 से अधिक आलेख बाटेनिकल डाँट काम पर भी है

सैकडो शोध पत्र है जो दुनिया भर की शोध पत्रिकाओ मे प्रकाशित हुये है। कुछ की सूची यहाँ है

हिन्दी मे किसानो के लिये तीन हजार लेख अब तक लिखे है जो देश भर की 18 से अधिक कृषि पत्रिकाओ मे प्रकाशित होते रहते है। इन्हे यूनीकोड मे फिर से टाइप कर नेट पर लाने के प्रयास कर रहा हूँ।



नवीनतम जानकारी आप मेरे होम पेज से प्राप्त कर सकते है।

Wednesday, April 23, 2008

ऐसे बचाया जा सकता है पुराने वृक्षो को

भारतीय पारम्परिक ज्ञान की मदद से कैसे पुराने वृक्षो को बचाया जा सकता है- इस विषय मे लेख आप आज ज्ञान जी के ब्लाग पर पढे।

http://hgdp.blogspot.com/2008/04/blog-post_23.html

Tuesday, April 15, 2008

गुबरैला एक समर्पित सफाई कर्मी है

आज ज्ञान जी के चिठ्ठे पर सूक्ष्मजीवो और गुबरैले के विषय मे विस्तृत जानकारी पाये। इस लिंक पर पधारे।

http://hgdp.blogspot.com/2008/04/blog-post_16.html