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Tuesday, July 31, 2007

वृक्ष, भूत और भगवान

जिन वृक्षो से जुडे है
भूत या भगवान
वो अब भी है सघन आबादी मे
विराजमान

क्यो ना भूत और भगवान से
हर वृक्ष को जोड दे
हो सकता है इससे ही लोग
इन्हे काटना छोड दे

भय ही शायद रोक
पायेगा इंसान को
और बचा पायेगा वृक्षो की
जान को

धरती को बचाने अन्ध-विश्वास की चादर
ओढ ले
क्यो ना भूत और भगवान से
हर वृक्ष को जोड दे
हो सकता है इससे ही लोग
इन्हे काटना छोड दे

चलो अब हर वृक्ष पर
एक कथा लिखे
जिससे वह भूत से लेकर
भविष्य तक जुडा दिखे

जग हित मे पर्यावरण संरक्षण को
एक नया मोड दे
क्यो ना भूत और भगवान से
हर वृक्ष को जोड दे
हो सकता है इससे ही लोग
इन्हे काटना छोड दे

पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित

Tuesday, June 26, 2007

हर ओर कारे ही कारे

नयी कारे, पुरानी कारे
हर ओर कारे ही कारे
प्रदूषण से लड लड
हम हारे

अब तो मौसम भी बदल रहा है
या कहे बदला ले रहा है
ठन्ड मे सुकून देने वाला सूरज
अब सब कुछ जला दे रहा है

अब तो हम अपनी भूल स्वीकारे
नयी कारे, पुरानी कारे
हर ओर कारे ही कारे
प्रदूषण से लड लड
हम हारे

मौसम पर विश्व सम्मेलन कर
व्यर्थ चिंता जताना अब छोडे
खुद छोटे प्रयास कर
आस-पास के लोगो को जोडे

बातो मे ही ना गँवा दे पल सारे
नयी कारे, पुरानी कारे
हर ओर कारे ही कारे
प्रदूषण से लड लड
हम हारे

क़ारो को छोड कुछ पैदल भी
चल ले
ताकि अच्छा स्वास्थ मिले और
बच्चे साफ हवा मे पल ले

नये पेड नही लगा सकते तो
पुराने को ही पाले और सँवारे
नयी कारे, पुरानी कारे
हर ओर कारे ही कारे
प्रदूषण से लड लड
हम हारे

पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’

Monday, June 18, 2007

’हत्या’ क्यो नही मानते है

वृक्षारोपण के नाम पर फिर
पतले विदेशी वृक्ष लगेंगे इस बार
और पुण्य का दम्भ भर कर
अपनी ही पीठ थपथपायेगी सरकार

सघन आबादी मे प्राण वायु का संचार
करते है पीपल और बरगद
पर आधुनिक योजनाकार मानते है
इन्हे विकास मे बाधक

यह जानते हुये कि ये ही
मिटा सकते है पर्यावरणीय विकार
वृक्षारोपण के नाम पर फिर
पतले विदेशी वृक्ष लगेंगे इस बार
और पुण्य का दम्भ भर कर
अपनी ही पीठ थपथपायेगी सरकार

वृक्ष मे जीवन है
यह सभी जानते है
फिर वृक्ष की कटाई को
’हत्या’ क्यो नही मानते है

पुराने वृक्षो को बचाने नये हरे कानूनो की है अब दरकार
वृक्षारोपण के नाम पर फिर
पतले विदेशी वृक्ष लगेंगे इस बार
और पुण्य का दम्भ भर कर
अपनी ही पीठ थपथपायेगी सरकार

पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’