सभी वरिष्ठो और कनिष्ठो के आशीष और प्यार भरे सन्देश के बाद मैने ब्लाग पर लिखते रहने का निर्णय लिया है। मै लिखता रहूंगा, जिसकी जैसी समझ है वह समझे। इस अनिश्चय की घडी मे आप सब शुभचिंतको के सहयोग के लिये मै आभारी हूँ। शुभचिंतको ने जो संघर्ष का हौसला दिया है उसे कायम रखूंगा।
आज शाम जंगल से वापस लौटा तो देखा सब जगह औधिया जी ही औधिया जी है। मै उन सभी का आभारी हूँ जिन्होने मेरे लेखो को कम से कम भाषण कहा। मै तो इस लायक भी नही हूँ। मै तो लिखने की कोशिश कर रहा हूँ। पता नही कब सफलता मिलेगी?
मै जब हिन्दी ब्लाग की दुनिया मे आया तो मुझे बताया गया कि कोई योग्यता की जरुरत नही है। सभी लोग यहाँ लिख सकते है। इसीलिये मैने लिखने की जुर्रत की। पर अब लगता है बडी गल्ती हो गयी। देश के बडे-बडे ब्लागर जिनके लेखन का मै प्रशंसक रहा हूँ सारे देश की समस्या को छोडकर इसमे अपनी ऊर्जा व्यर्थ कर रहे है कि मुझे लिखना आता है कि नही। पहले बताया होता तो मै स्वीकार कर लेता।
अब मेरे रुकने से आपको समस्या हो और आपकी इजाजत न हो तो ब्लाग की दुनिया से भी चला जाता हूँ। आखिर कितना समय लगता है ब्लाग डिलिट करने मे। मेरी ही गल्ती है जो विद्वत जनो के सामने मैने कलम उठाने की जुर्रत की।
मै गूगल का आभारी हूँ जिसने मुझे मौका दिया कि मै आप लोगो से मिल सका कुछ समय के लिये ही। अब मै अपने सभी ब्लाग मे नया लिखना बन्द कर रहा हूँ। और कोई आदेश हो तो बताये वह भी मै करने को तैयार हूँ पर आप जरा देश की समस्याओ पर ध्यान दे मुझ जैसे नाचीज को लेकर क्यो परेशान हो रहे है?
यह भी बताये कि क्या मै आगे लिखने की कोशिश कर सकता हूँ या नही? ब्लाग पर नही मेरे आका कागज पर?
उन सभी को धन्यवाद जिनके सानिध्य मे मैने जीवन का यह महत्वपूर्ण समय बिताया
ज्ञान जी, संजीव तिवारी जी, संजीत त्रिपाठी जी, रचना जी, घुघुती बासूती जी, अनूप शुक्ल जी, जय प्रकाश मानस जी, संजय तिवारी जी, मीनाक्षी जी, युनुस जी, सागर नाहर जी, अनिता कुमार जी, मसिजीवी जी, दिनेश जी, पीडी जी, महेन्द्र जी, अनिता कुमार जी, अनिल रघुराज जी, रवि रतलामी जी, समीर जी, अरविन्द जी, सारथी वाले गुरुजी, संजय जी, ममता जी, पीयूष जी, अन्नपूर्णा जी, जितेन्द्र जी, नीरज जी, अतुल जी, शिव जी, अजित जी, अभय जी और सभी जिनके नाम मै अभी याद नही कर पा रहा हूँ।