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Monday, June 29, 2009

हमने तो लिखा था पर यह तो सुनायी भी दे रहा है---

हमने तो लिखा था पर यह तो सुनायी भी दे रहा है---
- पंकज अवधिया


बडे दिनो बाद Goggle Knol मे जाना हुआ है। अपने लिखे पहले Knol मे गये तो वहाँ पोंगे का निशान दिखा। क्लिक किया तो कोई महाश्य Knol को पढकर सुनाने लगे। इस तकनीक से मै अभिभूत हूँ। यह किसने किया? उसमे तो किसी नाम का जिक्र नही दिखता है? अभी तो ये महाश्य अंग्रेजी मे बोलते है, क्या ये हिन्दी मे भी ऐसे ही बोल सकते है? यदि ऐसा हुआ तो मै उन लोगो तक अपनी बात सरलता से पहुँचा पाऊँगा जो पढ नही सकते है पर सुनकर अच्छी तरह समझ सकते है। ये रहा Knol का लिंक। इसमे सुनने वाले पोंगे पर क्लिक करे।

http://knol.google.com/k/pankaj-oudhia/emergency-herbs-used-by-the-traditional/3nerdtj3s9l79/2#

Sunday, May 31, 2009

ये कौन चित्रकार है? एक और अद्भुत जीव


13 जुलाई, 2008 को रायपुर से प्रकाशित होने वाले दैनिक छत्तीसगढ की ओर से यह चित्र मुझे भेजा गया इसके विषय मे जानने के लिये। मैने तो उन्हे जवाब भेज दिया जिसे उन्होने अपने अखबार मे प्रकाशित कर दिया।


आप यदि इस विषय मे जानते हो तो बताये।


मैने ये जानकारी भेजी।


"यह एटलस मोथ है जिसका वैज्ञानिक नाम एट्टाकस एटलस है। इसे विश्व का सबसे बडा मोथ कीट माना जाता है जिसके पंखो का पृष्ठ क्षेत्र 65 वर्ग इंच होता है। पंखो का फैलाव 10-12 इंच का होता है। भारत मे गैर-व्यवसायिक स्तर पर इसे पाला जाता है रेशम के लिये। इससे प्राप्त रेशम को फगारा रेशम कहा जाता है। इससे रेशम टूटे रेशो के रुप मे निकलता है। यह टिकाऊ होता है। ताइवान मे इसके कोकून का प्रयोग पर्स के रुप मे होता है। इसकी मादा एक विशेष प्रकार की गन्ध उत्सर्जित करती है जिसकी गन्ध से नर मीलो दूरी से खीचे चले आते है। नर तक गन्ध पहुँचे इसलिये वे ऐसी शाखाओ मे बैठती है जहाँ हवा तेज गति से बह रही होती है।"


© सर्वाधिकार सुरक्षित

Saturday, May 30, 2009

यह रही उस अजीबोगरीब जीव के बारे मे जानकारी

कल की पोस्ट मे दिख रहे अजीबोगरीब जीव के बारे मे तकनीकी जानकारी यह रही

"यह बेलास्टोमेटिड नर कीट है जो कि मादा द्वारा दिये गये अंडो को अपनी पीठ पर रखे हुये है। इन अंडो की देखरेख नर ही करेगा और मादा इसमे सहयोग करेगी। चित्र मे कीट के अग्र भाग पर जो छोटे लाल मकोडे दिख रहे है वे परजीवी है, नर के लिये भी और अंडो के लिये भी। "

Friday, May 29, 2009

क्या आपने ऐसा अजीबोगरीब जीव देखा है पहले?


16 सितम्बर, 2008 को रायपुर से प्रकाशित होने वाले दैनिक छत्तीसगढ की ओर से यह चित्र मुझे भेजा गया इसके विषय मे जानने के लिये। मैने तो उन्हे जवाब भेज दिया जिसे उन्होने अपने अखबार मे प्रकाशित कर दिया। आपको जवाब बताने से पहले मै आपके विचार भी जान लूँ।

Friday, March 6, 2009

बापू की निज वस्तुओ के बाद अब पारम्परिक धान की वापसी भी जरुरी

"इन बातो से यह स्पष्ट होता है कि विदेशो तक छत्तीसगढ का धान तो पहुँच गया पर इससे सम्बन्धित पारम्परिक ज्ञान नही पहुँचा। बडी विचित्र स्थिति है। हमारे पास ज्ञान है पर पारम्परिक धान नही और उनके पास हमारा धान है पर वे उसके चमत्कारिक उपयोग से अंजान है। यही बात मुझे शोध पत्रो के माध्यम से इस ज्ञान को प्रकाशित करने से रोकती रही है। आमतौर पर होता यह है कि पारम्परिक ज्ञान जिनके पास धान और धन है उनके पास पहुँचता है। पर इस बार हमे उल्टा करना होगा। कोहिनूर हीरे की वापसी की माँग की तरह अब छत्तीसगढ के परम्परिक चिकित्सको और किसानो को अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थानो से अपना औषधीय धान वापस माँगना होगा। ताकि इसके पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान के उपयोग से न केवल यहाँ के लोग रोगमुक्त हो सके बल्कि इस ज्ञान से पूरी दुनिया को रोगमुक्त करके यहाँ के किसान पीढीयो तक धान से लाभार्जन कर सके। "


पूरा लेख यहाँ पढे

कब होगा छत्तीसगढ मे “औषधीय धान क्रांति” का सूत्रपात?
- पंकज अवधिया

Tuesday, February 17, 2009

साहसी मनटोरा, आतंकवादियो के लिये आतंक की रानी

भारत मे विज्ञान कथाओ का टोटा है। ऐसी विज्ञान कथाए जो मजे मजे मे ही विज्ञान सीखा दे, बता दे। साहसी मनटोरा छत्तीसगढ के सुदूर भाग की एक आम सी दिखने वाली लडकी है जो गाँव और आस-पास के जंगलो से सीखी सीधी सरल बातो से दुनिया भर की समस्याए सुलझाने निकली है। चाहे आतकवादियो के कब्जे से गाँव को निकालना हो या आस्ट्रेलिया के जंगलो मे लगी आग को बुझाना हो, दुनिया भर मे मनटोरा को बुलाया जाता है। मनटोरा जिसे प्यार से उसके साथी “नोनी (Nonee)” पुकारते है, भारतीय विज्ञान कथामाला “Brave Mantora” की मुख्य नायिका है।

कथाओ के सारांश मै एक नये ब्लाग के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा हूँ। शीघ्र ही इस कथामाला को आप बाजार मे पुस्तक के रुप मे देख पायेंगे। इस कथामाला की एक कथा “Brave Mantora, a terror queen for terrorists.” के विषय मे जानने के लिये इस कडी मे पधारे।

http://indiansciencefiction.blogspot.com/2009/02/brave-mantora-terror-queen-for.html

Wednesday, December 17, 2008

धन्यवाद रवीश जी

सत्रह दिसम्बर, 2008 के दैनिक हिन्दुस्तान मे अपने नियमित साप्ताहिक स्तम्भ *ब्लाग-वार्ता* मे रवीश जी ने *मेरी प्रतिक्रिया* नामक मेरे ब्लाग के विषय मे अपने पाठको को जानकारी दी है। धन्यवाद, रवीश जी।



Friday, October 10, 2008

आपका अपना जिमीकन्द

खूब खाओ चटपटे व्यंजन
आराम से बिताओ जीवन
हो जब कब्ज
या अर्श का आगमन

तब मेरी याद करना तुरंत
करूंगा सब प्रबन्ध
मै हूँ गले मे खुजली करने वाला
आपका अपना जिमीकन्द

मुझे अपनी बाडी मे लगाना
रोज पानी जरुर दे जाना
बिना देखभाल उगने का मेरा दम
सभी ने माना

चाहे सब्जी की तरह पकाओ
या अचार के रुप मे लो आनन्द
मै हूँ गले मे खुजली करने वाला
आपका अपना जिमीकन्द

वैद्यो ने पहले पहचाना
कहा कि मुझमे है स्वास्थ्य का खजाना
आज का विज्ञान भी सीखाता है
मुझे आजमाना

पीढीयो से कर रहा
अच्छे स्वास्थ्य का नारा बुलन्द
मै हूँ गले मे खुजली करने वाला
आपका अपना जिमीकन्द

-पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’

© सर्वाधिकार सुरक्षित


[कृषि की शिक्षा के दौरान (और बाद मे भी) किसान गोष्ठियो के लिये मै इस प्रकार की छोटी पर जानकारी देने वाली कविताओ की रचना करता था। जिमीकन्द को सूरन भी कहा जाता है। अर्श बवासिर या पाइल्स को कहा जाता है।]

प्यारे भुईनीम

अब डर ओ नन्हे पौधे
तुझे ले जाने अब आते होंगे वो
तेरे उगने की बेसब्र प्रतीक्षा
पिछले बरस से कर रहे थे जो

अपनी कडवाहट से रोगियो मे
नवजीवन भरता असीम
हर जुल्म सहता तू बिना कडवाहट
प्यारे भुईनीम

काश! तुझे भी मिलता अवसर जीने का
फूलने और फलने का
जंगल की आजादी मे
मचलने का

काश! तू उगता वहाँ जहाँ न पहुँचे
व्यापारी और हकीम
हर जुल्म सहता तू बिना कडवाहट
प्यारे भुईनीम


-पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’

© सर्वाधिकार सुरक्षित


[भुईनीम एक देशी वनस्पति है जो हर साल छत्तीसगढ के जंगलो मे बरसात मे उगती है। इसकी कडवाहट नीम से भी अधिक होती है। मलेरिया से लेकर रक्त सम्बन्धी रोगो मे उपयोग की जाती है। जडी-बूटी से चिकित्सा करने वालो से लेकर व्यापारी तक इसके उगने की बाट जोहते रहते है और हर बार फलने-फूलने से पहले ही इसे एकत्र कर लिया जाता है। इस कविता मे भुईनीम के दर्द को सामने रखा गया है।]

Thursday, July 3, 2008

आखिर कब तक होती रहेगी भारतीय सम्पदा की चोरी इस तरह?

आखिर कब तक होती रहेगी भारतीय सम्पदा की चोरी इस तरह?

- पंकज अवधिया

कल ही मुझे एक भारतीय वैज्ञानिक का सन्देश मिला जिसमे संकट मे पडे दो विदेशी वैज्ञानिको को बचाने आन-लाइन याचिका पर हस्ताक्षर करने की अपील की गयी थी। इस सन्देश मे कहा गया था दोनो विदेशी वैज्ञानिको ने भारतीय कानून तोडा है पर चूँकि उनका विश्व मे बहुत नाम है इसलिये उन्हे छोड दिया जाना चाहिये। मैने इंटरनेट पर खोजा तो घटना की जानकारी मिली। घटना दार्जिलिंग के पास की है जहाँ इसी साल जून के अंतिम सप्ताह मे चेक गणराज्य के दो नागरिक राष्ट्रीय वन्यप्राणी अभ्यारण्य मे बिना अनुमति के सैकडो कीडो के साथ पकडाये। वन विभाग ने वन्यप्राणी सुरक्षा अधिनियम के तहत उन पर कार्यवाही की और न्यायालय ने उन्हे जमानत देने से इंकार कर दिया। अब अगले सप्ताह इसकी सुनवाई होगी। यह भी जानकारी मिली कि इनके पास टाइगर बीटल नामक विशेष आर्थिक महत्व के कीट पाये गये जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार विशेषकर चीन मे बहुत माँग है। एक कीट की कीमत हजारो मे है। जिस भारतीय वैज्ञानिक ने अपील भेजी थी उसका तर्क था कि इन लोगो ने अपने म्यूजियम के लिये इसे एकत्र किया होगा। इतने बडे वैज्ञानिक व्यापार के लिये ऐसा नही कर सकते।

पूरा लेख इस कडी पर पढे

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3180&page=12370

Wednesday, May 28, 2008

आइये बचाये, भगवान की इस निरीह बुढिया को

भगवान की बुढिया के विषय मे आज रोचक लेख आप ज्ञान जी के चिठ्ठे मे पढ सकते है।

http://hgdp.blogspot.com/2008/05/blog-post_28.html

Tuesday, May 20, 2008

वनस्पतियो के साधारण प्रयोग से बचे मच्छरो से

आज ज्ञान जी के चिठ्ठे पर आप इस विषय मे उपयोगी जानकारी प्राप्त कर सकते है। इस कडी को चटकाए

http://hgdp.blogspot.com/2008/05/blog-post_21.html

नंगे होते पहाड, प्रकृति का उजडता संसार

यह हिन्दी लेख इकोपोर्ट मे पीडीएफ के रुप मे उपलब्ध है। यह देश भर मे प्रकाशित हो चुका है। आप इस कडी पर जाकर इस लेख को पढ सकते है।

http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557435

Monday, May 19, 2008

अतिथि देवो भव: : वर्तमान परिपेक्ष्य मे कितना प्रासंगिक?

यह हिन्दी लेख देश भर मे छप चुका है। मनुज फीचर्स के सौजन्य से भी। आप इकोपोर्ट मे इसे पढ सकते है। यह पीडीएफ मे है। आप इस कडी पर जाकर डाउनलोड कर सकते है।

http://ecoport.org/ep?SearchType=reference&ReferenceID=557477

Saturday, May 17, 2008

छै घंटे मे औसतन 1000 पन्ने लिख पाने का अनुभव

छै घंटे मे औसतन 1000 पन्ने लिख पाने का अनुभव निश्चित ही अनोखा है। पिछले कुछ समय से मै प्रतिदिन यही कर रहा हूँ। मधुमेह और ह्रदय रोगो की वैज्ञानिक रपटो पर काम चल रहा है। मधुमेह की रपट मे 75,000 से अधिक और ह्रदय रोगो की रपट मे अब 20 हजार से अधिक पन्ने लिखे जा चुके है। पिछले कुछ दिनो मे किये गये कार्यो के अंश आप इन कडियो मे देख सकते है।

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Keyword=heart1&KeywordWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Keyword=heart2&KeywordWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Keyword=heart3&KeywordWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Keyword=heart4&KeywordWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Keyword=heart5&KeywordWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Keyword=heart6&KeywordWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Title=Traditional+Shurbut+%28Sherbet%29+based+365+days+schedule+%28III%29&KeywordWild=CO&TitleWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Title=Traditional+Shurbut+%28Sherbet%29+based+365+days+schedule+%28IV%29&KeywordWild=CO&TitleWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Title=Traditional+Shurbut+%28Sherbet%29+based+365+days+schedule+%28V%29&KeywordWild=CO&TitleWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Title=Traditional+Shurbut+%28Sherbet%29+based+365+days+schedule+%28VI%29&KeywordWild=CO&TitleWild=CO

http://ecoport.org/ep?SearchType=interactiveTableList&Title=Traditional+Shurbut+%28Sherbet%29+based+365+days+schedule+%28VII%29&KeywordWild=CO&TitleWild=CO


यदि एक पन्ने की टाइपिंग का बाजार भाव पाँच रुपये भी पकडे तो रोज पाँच हजार रुपयो का काम हो जाता है। फिर बाजार मे शायद की कोई रोज एक हजार पन्ने कर पाये बिन गल्ती के। ये सारे काम अपनी जेब से हो रहे है इसलिये बाहरी मदद की तो सोच भी नही सकते।

इतना अधिक लिखने के कारण शरीर पर कुछ बुरे प्रभाव भी हो रहे है। आँखो पर सबसे अधिक असर है। दोनो आँखो के चारो ओर काले चक्र बन जाते है। नीन्द मे भी यह लेखन चलता रहता है। इसलिये लम्बी नीन्द के बाद भी थकान बनी रहती है। शाम को दो घंटे खेलने चला जाता हूँ इसलिये तन और मन तरोताजा हो जाते है।

पहले मै दो से तीन पन्ने ही एक दिन मे लिख पाता था पर वर्तमान गति को पाने मे तीन साल लगे। आगे का लक्ष्य है एक दिन मे 10,000 पन्ने लिखना , कम से कम बीस दिनो तक। इन दोनो रपटो मे इतनी सारी जानकारियाँ है कि इन्हे पूरा करने के लिये यह गति जरुरी है। कभी आप भी प्रयास करियेगा इस गति से लिख पाने का।



आप यह भी पढ ले

http://dardhindustani.blogspot.com/2008/05/blog-post_17.html



For further updates on report, keep visiting this link



Note on Scientific Report titled ‘Traditional medicinal knowledge about herbs and herbal combinations used in treatment of Type II Diabetes in India with special reference to Chhattisgarh’.
by
Pankaj Oudhia

http://ecoport.org/ep?SearchType=earticleView&earticleId=3077&page=-2






Tuesday, May 6, 2008

भारतीय सैन्य अभियानो के लिये उपयोगी वनस्पतियाँ

आज युद्ध मे प्रयोग होने वाली वनस्पतियो के विषय मे पढे ज्ञान जी के चिठ्ठे मे

http://hgdp.blogspot.com/2008/05/blog-post_07.html