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Friday, October 10, 2008

आपका अपना जिमीकन्द

खूब खाओ चटपटे व्यंजन
आराम से बिताओ जीवन
हो जब कब्ज
या अर्श का आगमन

तब मेरी याद करना तुरंत
करूंगा सब प्रबन्ध
मै हूँ गले मे खुजली करने वाला
आपका अपना जिमीकन्द

मुझे अपनी बाडी मे लगाना
रोज पानी जरुर दे जाना
बिना देखभाल उगने का मेरा दम
सभी ने माना

चाहे सब्जी की तरह पकाओ
या अचार के रुप मे लो आनन्द
मै हूँ गले मे खुजली करने वाला
आपका अपना जिमीकन्द

वैद्यो ने पहले पहचाना
कहा कि मुझमे है स्वास्थ्य का खजाना
आज का विज्ञान भी सीखाता है
मुझे आजमाना

पीढीयो से कर रहा
अच्छे स्वास्थ्य का नारा बुलन्द
मै हूँ गले मे खुजली करने वाला
आपका अपना जिमीकन्द

-पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’

© सर्वाधिकार सुरक्षित


[कृषि की शिक्षा के दौरान (और बाद मे भी) किसान गोष्ठियो के लिये मै इस प्रकार की छोटी पर जानकारी देने वाली कविताओ की रचना करता था। जिमीकन्द को सूरन भी कहा जाता है। अर्श बवासिर या पाइल्स को कहा जाता है।]

Friday, June 27, 2008

एक बार किसानो पर लिख कर उन्हे भूल गये












एक बार किसानो पर लिख कर

उन्हे भूल गये

जाने कितने किसान अब तक

कर्ज के फन्दे मे झूल गये


अब बस भी करो चन्द पंक्तियाँ लिखकर

कर्तव्यो की इतिश्री करना

अन्नदाता का मरना है

एक देश का मरना


सो रहा सत्तापक्ष और इस देश का

विपक्ष भी

हर समस्या मे दिखती उन्हे

राजनीति ही


देश के व्यापारी अब

कर रहे है खेती

आम लोग का पेट नही

बस अपनी गाडी दिखायी देती


मेरे देश की धरती

सोना उगले

और मुठ्ठी भर लोग

इसे निगले


अरबो के बंगले मे रहने की खबरे

छपवाने वालो

या हेलीकाप्टर पर जनता का पैसा

बहाने वालो


या बात-बात पर एसएमएस

करने वालो

कुछ तो दिल अपना

खोलो

देश हुआ अन्धेर नगरी और

राजा चौपट भये

जाने कितने किसान अब तक

कर्ज के फन्दे मे झूल गये


एक बार किसानो पर लिख कर

उन्हे भूल गये

जाने कितने किसान अब तक

कर्ज के फन्दे मे झूल गये

पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’

© सर्वाधिकार सुरक्षित

आप आये इसके लिये आभार। कृपया टिप्पणी न करे। यदि किसानो के प्रति कुछ करना चाहते है तो राजनेताओ और योजनाकारो पर दबाव बनाये, दलगत राजनीति से उठकर क्योकि अन्नदाता किसी दल विशेष के लिये अन्न नही उपजाते और रोटी की कोई पार्टी नही होती। अब समय आ गया है कि पीढीयो के कर्ज को उतारकर किसानो को कर्ज से मुक्ति दिलाने का।


क्या आप किसी ऐसी संस्था को जानते है जो दानदाताओ और किसानो के बीच सेतु बन सके। बहुत से लोग है जो किसानो को सीधे मदद करना चाहते है पर कैसे उन तक पहुँचे यह नही समझ पाते है? क्या सरकार किसानो को दी जाने वाली सीधी मदद को टैक्स फ्री करेगी या कुछ रियायत देगी? क्या किसानो की सूची, उन पर कर्ज और उनके पते का ब्यौरा कही से मिल सकेगा?

चलिये, कविता पर पहली प्रतिक्रिया के तहत किसानो को दस हजार रुपये देने की इच्छा एक पाठक ने जतायी है पर वे पूछ रहे है कि इस दिशा मे कैसे बढा जाये? धन्यवाद। आपके सुझाव आमंत्रित है।