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Sunday, November 23, 2008
Friday, October 10, 2008
आपका अपना जिमीकन्द
खूब खाओ चटपटे व्यंजन
आराम से बिताओ जीवन
हो जब कब्ज
या अर्श का आगमन
तब मेरी याद करना तुरंत
करूंगा सब प्रबन्ध
मै हूँ गले मे खुजली करने वाला
आपका अपना जिमीकन्द
मुझे अपनी बाडी मे लगाना
रोज पानी जरुर दे जाना
बिना देखभाल उगने का मेरा दम
सभी ने माना
चाहे सब्जी की तरह पकाओ
या अचार के रुप मे लो आनन्द
मै हूँ गले मे खुजली करने वाला
आपका अपना जिमीकन्द
वैद्यो ने पहले पहचाना
कहा कि मुझमे है स्वास्थ्य का खजाना
आज का विज्ञान भी सीखाता है
मुझे आजमाना
पीढीयो से कर रहा
अच्छे स्वास्थ्य का नारा बुलन्द
मै हूँ गले मे खुजली करने वाला
आपका अपना जिमीकन्द
-पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’
© सर्वाधिकार सुरक्षित
[कृषि की शिक्षा के दौरान (और बाद मे भी) किसान गोष्ठियो के लिये मै इस प्रकार की छोटी पर जानकारी देने वाली कविताओ की रचना करता था। जिमीकन्द को सूरन भी कहा जाता है। अर्श बवासिर या पाइल्स को कहा जाता है।]
आराम से बिताओ जीवन
हो जब कब्ज
या अर्श का आगमन
तब मेरी याद करना तुरंत
करूंगा सब प्रबन्ध
मै हूँ गले मे खुजली करने वाला
आपका अपना जिमीकन्द
मुझे अपनी बाडी मे लगाना
रोज पानी जरुर दे जाना
बिना देखभाल उगने का मेरा दम
सभी ने माना
चाहे सब्जी की तरह पकाओ
या अचार के रुप मे लो आनन्द
मै हूँ गले मे खुजली करने वाला
आपका अपना जिमीकन्द
वैद्यो ने पहले पहचाना
कहा कि मुझमे है स्वास्थ्य का खजाना
आज का विज्ञान भी सीखाता है
मुझे आजमाना
पीढीयो से कर रहा
अच्छे स्वास्थ्य का नारा बुलन्द
मै हूँ गले मे खुजली करने वाला
आपका अपना जिमीकन्द
-पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’
© सर्वाधिकार सुरक्षित
[कृषि की शिक्षा के दौरान (और बाद मे भी) किसान गोष्ठियो के लिये मै इस प्रकार की छोटी पर जानकारी देने वाली कविताओ की रचना करता था। जिमीकन्द को सूरन भी कहा जाता है। अर्श बवासिर या पाइल्स को कहा जाता है।]
प्यारे भुईनीम
अब डर ओ नन्हे पौधे
तुझे ले जाने अब आते होंगे वो
तेरे उगने की बेसब्र प्रतीक्षा
पिछले बरस से कर रहे थे जो
अपनी कडवाहट से रोगियो मे
नवजीवन भरता असीम
हर जुल्म सहता तू बिना कडवाहट
प्यारे भुईनीम
काश! तुझे भी मिलता अवसर जीने का
फूलने और फलने का
जंगल की आजादी मे
मचलने का
काश! तू उगता वहाँ जहाँ न पहुँचे
व्यापारी और हकीम
हर जुल्म सहता तू बिना कडवाहट
प्यारे भुईनीम
-पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’
© सर्वाधिकार सुरक्षित
[भुईनीम एक देशी वनस्पति है जो हर साल छत्तीसगढ के जंगलो मे बरसात मे उगती है। इसकी कडवाहट नीम से भी अधिक होती है। मलेरिया से लेकर रक्त सम्बन्धी रोगो मे उपयोग की जाती है। जडी-बूटी से चिकित्सा करने वालो से लेकर व्यापारी तक इसके उगने की बाट जोहते रहते है और हर बार फलने-फूलने से पहले ही इसे एकत्र कर लिया जाता है। इस कविता मे भुईनीम के दर्द को सामने रखा गया है।]
तुझे ले जाने अब आते होंगे वो
तेरे उगने की बेसब्र प्रतीक्षा
पिछले बरस से कर रहे थे जो
अपनी कडवाहट से रोगियो मे
नवजीवन भरता असीम
हर जुल्म सहता तू बिना कडवाहट
प्यारे भुईनीम
काश! तुझे भी मिलता अवसर जीने का
फूलने और फलने का
जंगल की आजादी मे
मचलने का
काश! तू उगता वहाँ जहाँ न पहुँचे
व्यापारी और हकीम
हर जुल्म सहता तू बिना कडवाहट
प्यारे भुईनीम
-पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’
© सर्वाधिकार सुरक्षित
[भुईनीम एक देशी वनस्पति है जो हर साल छत्तीसगढ के जंगलो मे बरसात मे उगती है। इसकी कडवाहट नीम से भी अधिक होती है। मलेरिया से लेकर रक्त सम्बन्धी रोगो मे उपयोग की जाती है। जडी-बूटी से चिकित्सा करने वालो से लेकर व्यापारी तक इसके उगने की बाट जोहते रहते है और हर बार फलने-फूलने से पहले ही इसे एकत्र कर लिया जाता है। इस कविता मे भुईनीम के दर्द को सामने रखा गया है।]
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Andrographis paniculata,
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poetry
Wednesday, May 28, 2008
आइये बचाये, भगवान की इस निरीह बुढिया को
भगवान की बुढिया के विषय मे आज रोचक लेख आप ज्ञान जी के चिठ्ठे मे पढ सकते है।
http://hgdp.blogspot.com/2008/05/blog-post_28.html
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Wednesday, April 30, 2008
Thursday, April 3, 2008
ह्रदय रोगो को कहे अलविदा असाधारण पारम्परिक ज्ञान के साधारण प्रयोग से
गुरुवारीय अतिथि स्तम्भ मे आज यह लेख इस कडी पर पढे।
http://traditionalmedicine.agoodplace4all.com/post13.php
http://traditionalmedicine.agoodplace4all.com/post13.php
Thursday, March 27, 2008
यदि पैरो मे गति हो तो क्या कर लेंगी राहे
आज आप यह लेख इस कडी पर जाकर पढ सकते है। यह लेख निज अनुभव पर आधारित है।
http://traditionalmedicine.agoodplace4all.com/post12.php
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Thursday, March 20, 2008
अपने ही देश मे क्यो दुत्कारी जा रही पारम्परिक चिकित्सा पद्धति?
'आप भारतीय कानून को मानते है तो इनसे दूर रहे। क्यो? क्योकि हमारा कानून इनको नीम-हकीम कहता है। इन्हे इलाज करने की छूट नही है। भले ही विदेशो से वैज्ञानिक आये और इनके ज्ञान के आधार पर दवा बनाकर पेटेंट कराये पर इन पारम्परिक चिकित्सको को यह करने की छूट नही है।'
पूरा लेख इस कडी पर जाकर पढे।
http://traditionalmedicine.agoodplace4all.com/post11.php
पूरा लेख इस कडी पर जाकर पढे।
http://traditionalmedicine.agoodplace4all.com/post11.php
Wednesday, March 5, 2008
पारम्परिक चिकित्सकीय ज्ञान के दस्तावेजीकरण के दौरान हो रहे विचित्र अनुभव-1
गुरुवारीय अतिथि स्तम्भ मे आज आप यह लेख इस कडी पर पढ सकते है।
http://traditionalmedicine.agoodplace4all.com/post9.php
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Tuesday, March 4, 2008
तनाव और किडनी के रोगों में उपयोगी चटनिया
इस विषय मे आज उपयोगी जानकारी प्राप्त करे ज्ञान जी के चिठ्ठे से
http://hgdp.blogspot.com/2008/03/blog-post_05.html
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