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Wednesday, February 20, 2008

मै प्रविष्ट हुआ काव्य क्षेत्र मे

ह्र्दय की गहराइयो मे छिपे

मर्म को

मष्तिष्क मे छिपे

मानव-धर्म को

आत्मा मे छिपे

पुण्य-कर्म को

समेटकर औ

जीवन सत्यो को भरकर नेत्र मे

मै प्रविष्ट हुआ काव्य क्षेत्र मे


आम-नागरिको के

जीवन से

बरसो से दुख सहते

मन से

और फिर भी आशीष के शब्द कहते

जन से

भेटकर औ

जीवन सत्यो को भरकर नेत्र मे

मै प्रविष्ट हुआ काव्य क्षेत्र मे


दुख देश का

दुख परिवेश का

और दुख

समय-विशेष का

देखकर औ

जीवन सत्यो को भरकर नेत्र मे

मै प्रविष्ट हुआ काव्य क्षेत्र मे

पंकज अवधिया दर्द हिन्दुस्तानी

© सर्वाधिकार सुरक्षित

स्कूल के दिनो मे लिखी कविता।