Saturday, July 7, 2007

धन्य हो इंटरनेट पर लिखने वालो

धन्य हो इंटरनेट पर लिखने वालो
जो तुमने बेकसूर वृक्षो का जीवन बचाया है
कागज का परित्याग कर
पर्यावरण संरक्षण का सही पाठ पढाया है

जितने पढने वाले नही उतने अखबार
छ्प रहे है
किसी को सुध नही कि इससे रोज
कितने पेड कट रहे है

अपने स्वार्थ के लिये यह सर्वनाशी जाल
फैलाया है
धन्य हो इंटरनेट पर लिखने वालो
जो तुमने बेकसूर वृक्षो का जीवन बचाया है
कागज का परित्याग कर
पर्यावरण संरक्षण का सही पाठ पढाया है

बेकार उग रहे पौधो से तैयार कागज ही पर
अब अखबार छ्पने चाहिए
वृक्षो की लाशो पर पर्यावरण संरक्षण के नारे
नही दिखने चाहिए

प्राकृतिक असंतुलन ने पहले ही चेताया है
फिर अब मौसम भी गरमाया है
धन्य हो इंटरनेट पर लिखने वालो
जो तुमने बेकसूर वृक्षो का जीवन बचाया है
कागज का परित्याग कर
पर्यावरण संरक्षण का सही पाठ पढाया है

पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित

7 comments:

Udan Tashtari said...

आभार!! :)

36solutions said...

पंकज भईया धन्‍यवाद, जो आपने हम पर नजरे इनायत की । अच्‍छी कविता के लिए भी हमारी शुभकामनायें

ePandit said...

अच्छी कविता आपने एकदम सही मुद्दा उठाया है, कंप्यूटर/इंटरनैट पर लिखने से करोड़ो टन कागज की बचत हो सकती है जिससे कि अंततः पर्यावरण का भला होगा।

Sanjeet Tripathi said...

सही है पंकज जी!!

मुझे यह आश्चर्य हो रहा है कि अभी तक मेरी नज़र आपके चिट्ठे पर क्यों नही गई!!
अपनी इस गलती पर मुझे अफ़सोस है!

Gyan Dutt Pandey said...
This comment has been removed by the author.
Reetesh Gupta said...

बहुत सुंदर....बधाई

Divine India said...

सत्य…सुंदर्…और…।
Beautiful!!!