Thursday, July 12, 2007

रहमान का हवाई-टेल

कौन कहता है अंग्रेज चले गये
जारी है अभी भी लूटने का खेल
बात-बात पर जनता को बरगला रहा
रहमान का हवाई-टेल

आम लोगो की गाढी कमाई को
दीमक की तरह चट कर ज़ाते है
ऐसे आस्तीन के साँपो की मदद करने वाले
क्यो जन-प्रतिनिधि कहलाते है

जनता के राज मे इनकी सही जगह है जेल
कौन कहता है अंग्रेज चले गये
जारी है अभी भी लूटने का खेल
बात-बात पर जनता को बरगला रहा
रहमान का हवाई-टेल

क्यो ना उप्भोक्ता अब एक हो
और रहमान जैसो का भी बहिष्कार करे
ताकि देश के नव-आदर्श पैसे नही
देश से प्यार करे

गाँधी जी का बल ही इन पर कस सकता है नकेल
कौन कहता है अंग्रेज चले गये
जारी है अभी भी लूटने का खेल
बात-बात पर जनता को बरगला रहा
रहमान का हवाई-टेल

पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’

इंटरनेट ब्राँडबेंड मे हाल ही से शुरु किये गये ‘लूट-खसोट अभियान’ के विरोध मे इसे लिखा गया है। इस अभियान मे बात-बात पर पैसे लिये जा रहे है। यहाँ तक कि उनकी गल्ती होने पर भी घर आने के पैसे बिना किसी सूचना के लिये जा रहे है। यह ळूट की मानसिकता का सबूत है। अब समय आ गया है कि हम सब खुलकर बोले। एक बेबस कवि ने कलम की ताकत को महसूस कर यह मोर्चा खोला है।

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित

2 comments:

परमजीत सिहँ बाली said...

पंकज जी,आप बहुत अच्छा लिखते हो। देश की ज्वलंत समस्या पर लिखी यह कविता बहुत बढिया है।देश के प्रति आप का प्रेम देख मन प्रसन्न हो गया।बधाई।

क्यो ना उप्भोक्ता अब एक हो
और रहमान जैसो का भी बहिष्कार करे
ताकि देश के नव-आदर्श पैसे नही
देश से प्यार करे

Satyendra Prasad Srivastava said...

अच्छा लिखा है