Thursday, July 5, 2007

गाजर घास और भ्रष्टाचार

गाजर घास और भ्रष्टाचार दोनो ही का
हो रहा है निर्बाध फैलाव
जैसे शरीर मे फैलता है
कोई पुराना घाव

माना कि गाजर घास
पराई है
विदेश से भारत
आई है

पर भ्रष्टाचार तो
हमारी ही देन है
और लम्बे समय से छीन
रहा चैन है

दोनो ही से ना जाने क्यो
योजनाकारो को है लगाव
गाजर घास और भ्रष्टाचार दोनो ही का
हो रहा है निर्बाध फैलाव
जैसे शरीर मे फैलता है
कोई पुराना घाव

दोनो ही से लडाई मे
हमने अब तक मुँह की खाई है
बहुत मेहनत के अलावा
पूँजी भी गँवाई है

अब दोनो के समूल नाश की है जरुरत
चाहे लगाना पडे कैसा भी दाँव
गाजर घास और भ्रष्टाचार दोनो ही का
हो रहा है निर्बाध फैलाव
जैसे शरीर मे फैलता है
कोई पुराना घाव

पंकज अवधिया ‘दर्द हिन्दुस्तानी’

गाजर घास (पार्थेनियम) आयातित गेहूँ के साथ आया विदेशी खरपतवार है और मनुष्यो, फसलो और पशुओ सभी के लिये अभिशाप है। इसके विषय मे विस्तार के लिये देखे
http://www.iprng.org

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित

4 comments:

Udan Tashtari said...

बहुत अलग तरह से बात कही...पसंद आयी... :)

अनूप शुक्ल said...

गाजरघास को बार-बार जड़ से उखाड़ने से उसका पनपना बंद हो जाता है। भ्रष्टाचार का भी कुछ ऐसा ही है। बार-बार जड़ से उखाड़ना पड़ेगा।

36solutions said...

Thanks, Pankaj Bhaiya. yahan Bhilai me dono bahut hai

Divine India said...

बिल्कुल अलग विषय को पकड़ा है, बहुत अच्छा लग रहा है आपको पढ़ना…।