Thursday, July 16, 2009

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-10

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-10
- पंकज अवधिया

ओ पहाड, मेरे पहाड


नवम्बर 12, 2008 को घुघूती बासूती जी के ब्लाग “घुघूती बासूती” के माध्यम से प्रस्तुत की गयी यह कविता वास्तव मे उनके मन से उद्दाम वेग से निकली अभिव्यक्ति है। जो पहाडो मे जन्मा हो, वो भला पहाडो से दूर कैसे रह सकता है।

इस प्रस्तुति मे वे लिखती है-

ओ पहाड़, मेरे पहाड़,
बुला ले वापिस पहाड़
मन व्याकुल है पाने को
तेरी ठंडी बयार ।

स्वस्थ पवन का जोर जहाँ
घुघुती का मार्मिक गीत जहाँ
काफल पाक्यो त्यूल नईं चाख्यो
की होती गूँज जहाँ ।

हर पक्षी कितना अपना है
हर पेड़ जहाँ पर अपना है
कभी शान्त तो कभी चट्टानें
बहा लाने वाली तेरी नदियाँ ।

http://ghughutibasuti.blogspot.com/2008/11/blog-post_12.html

भूमिका: हिन्दी ब्लाग परिवार मे शामिल होने के बाद मैने अनगिनत चिठ्ठे पढे और इनमे प्रकाशित विचारो/लेखो/निबन्धो/कहानियो ने मेरे जीवन को बहुत प्रभावित किया। यह मेरा कर्तव्य है कि मै फिर इन खूबसूरत मोतियो को आपके सामने प्रस्तुत करुँ ताकि आप हिन्दी ब्लागरो के अविस्मरणीय योगदान को एक बार फिर से जान सके।

Wednesday, July 15, 2009

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-9

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-9
- पंकज अवधिया


अरुण फूसगढी की कहानी

मई 3, 2008 को माननीय अजीत वडनेकर जी के ब्लाग “शब्दो के सफर” के माध्यम से “बकलमखुद” नामक प्रस्तुति मे माननीय अरुण अरोरा जी ने अपनी जीवन गाथा हम सबके सामने रखी जो एक धारावाहिक के रुप मे थी। इस जीवन गाथा से मैने उनके अथक संघर्ष को जाना। इस प्रस्तुति ने मुझे हौसला दिया कि किसी भी कठिन परिस्थिति मे हाथ-पैर ढीले कर बैठने से कुछ नही होगा। आज भी जब मै अवसादग्रस्त होता हूँ तो इस जीवन गाथा का आश्रय लेता हूँ।

इस प्रस्तुति मे वे लिखते है-

“तो बात रामपुर की हो रही थी सुंदर शहर ,और शहर वाले भी बहुत सुंदर दिल के. दुनिया मे भले ही रामपुरी चाकू मशहूर हो,पर रामपुर के लोग दिल मे उतर जाते है. यहा छह साल रहा इन छह सालो मे लगा मेरा घर यही है.इतना प्यार की समेटा ना जाये. जौली टी वी रामपुर मे मै एक ट्रेनी की तरह लगा था और जब छॊडी तब मै प्रबंधकों की गिनती मे आ चुका था. मालिको से प्यार मिला घर के बडे की तरह. जब मै वहां काम करता था तो दूसरो की तरह मै भी उन्हे कभी कभी गालियो से नवाजा करता था. दिन मे हम १२ से १६ घंटे काम करते थे ,लेकिन मै आज सोचता हूं ,आज मै जो कुछ हूं उन्ही की वजह से हूं. उन्होने काम करने की इतनी आदत डाल दी है कि मै छुट्टी वाले दिन भी घर मे नही रुक सकता.”

http://shabdavali.blogspot.com/2008/05/40.html

भूमिका: हिन्दी ब्लाग परिवार मे शामिल होने के बाद मैने अनगिनत चिठ्ठे पढे और इनमे प्रकाशित विचारो/लेखो/निबन्धो/कहानियो ने मेरे जीवन को बहुत प्रभावित किया। यह मेरा कर्तव्य है कि मै फिर इन खूबसूरत मोतियो को आपके सामने प्रस्तुत करुँ ताकि आप हिन्दी ब्लागरो के अविस्मरणीय योगदान को एक बार फिर से जान सके।

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-8

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-8
- पंकज अवधिया

बाबूजी का मकान और मकान मे उनका फ्रेम


2 जनवरी, 2009 को माननीय रवीश कुमार जी के ब्लाग “कस्बा” मे माध्यम से की गयी यह प्रस्तुति मन को भारी कर देती है। एक पुत्र का कविता के माध्यम से अपने पिता को इस दर्द भरे अन्दाज मे याद करना, मैने शायद ही कही ऐसी बेहतरीन प्रस्तुति देखी होगी।

इस प्रस्तुति मे वे लिखते है-

“सिर्फ एक तस्वीर बन जायेंगे
एक ही कमीज़ में नज़र आयेंगे
वही चश्मा अब दिखेगा बार बार
सिर्फ सीध में ही देखते मिलेंगे
देखा तो लगा नहीं कि यही हैं
बाबूजी”

“दफ़्तर की इतनी गहमागहमी में भी अकेला हो जाता हूं। लगता है कि बाबूजी आ जाते तो सारी अधूरी बातें कह देता। एक बार छू लेता। अब कुछ भी हासिल नहीं लगता। पहले लगता था। इसलिए लगता था कि बाबूजी को बताता था। अब न इनाम में दिलचस्पी है न पदनाम में। लगता है कि दिन भर ढूंढता ही रह जाऊं बाबूजी को।“


http://naisadak.blogspot.com/2009/01/blog-post_02.html

भूमिका: हिन्दी ब्लाग परिवार मे शामिल होने के बाद मैने अनगिनत चिठ्ठे पढे और इनमे प्रकाशित विचारो/लेखो/निबन्धो/कहानियो ने मेरे जीवन को बहुत प्रभावित किया। यह मेरा कर्तव्य है कि मै फिर इन खूबसूरत मोतियो को आपके सामने प्रस्तुत करुँ ताकि आप हिन्दी ब्लागरो के अविस्मरणीय योगदान को एक बार फिर से जान सके।

Tuesday, July 14, 2009

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-7

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-7
- पंकज अवधिया

जो सुकूं गाँव के मकान में है


21 सितम्बर, 2007 को माननीय नीरज गोस्वामी जी के ब्लाग “नीरज” के माध्यम से की गयी इस प्रस्तुति मे सहजता भी है और गहरायी भी। नीरज जी को मै लगातार पढता रहा हूँ। उनकी सभी बेहतरीन रचनाओ मे से एक को चुनना बडा ही मुश्किल काम है।

इस प्रस्तुति मे वे लिखते है-

वो ना महलों की ऊंची शान में है
जो सुकूं गांव के मकान में है

लूटा उसने ही सारी फसलों को
हमने समझा जिसे मचान में है

http://ngoswami.blogspot.com/2007/09/blog-post_21.html

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Sunday, July 12, 2009

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-6

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-6
- पंकज अवधिया

उफनती कोसी को देख शिवनाथ की यादे: संस्मरण


11 सितम्बर, 2008 को माननीय संजीव तिवारी जी के ब्लाग “आरम्भ” की इस प्रस्तुति मे शिवनाथ नदी की बाढ का बडे ही रोचक ढंग से वर्णन किया गया है। बाढ, इसमे फँसे जीव-जंतुओ की दशा, गाँव वालो का एका, सेना के जवानो का जबरदस्त साहस, स्वयम लेखक की हिम्मत- बाढ की विभीषिका का ऐसा वर्णन मैने पहले कभी नही पढा। संजीव जी लिखते है-

“हमारे साथ चले रहे एक सैनिक नें हमें बतलाया कि कल ऐसा ही एक छोटा चींटी का टीला बचाव दल के नाव से टकरा गया था जिससे करोडों चींटिंयां नाव में आ गई थी, सैनिकों की सहनशक्ति व बहादुरी के कारण नाव डूबते डूबते बची थी उस नाव में सवार पांचों सैनिकों को चीटियों नें जगह जगह काटा है उनका शरीर सूज गया है जिनका कैम्प में इलाज चल रहा है । उसने बतलाया था कि चीटिंयों के बहते ढेर से टकराने के कारण ढेर तुकडों में बंट गया और एक हिस्सा उछलकर नाव में सैनिकों के उपर ही गिरा था, सैनिकों नें अपने आप को संयत रखते हुए शरीर में हलचल नहीं होने दिया जिसके कारण चीटिंया नाव में एक जगह इकत्र हो गई बाद में फावडे से उन्हें पानी में फेंका गया।“

http://aarambha.blogspot.com/2008/09/blog-post.html

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Saturday, July 11, 2009

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-5

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-5
- पंकज अवधिया


कजरारी आँखे

14 अक्टूबर, 2007 को दुबई की ब्लागर मीनाक्षी जी के ब्लाग “प्रेम ही सत्य है” के माध्यम से की गयी यह प्रस्तुति कम शब्दो मे सब कुछ कह जाती है। इस प्रस्तुति के साथ संलग्न चित्र ने सोने मे सुहागा का काम किया है।

इस प्रस्तुति मे वे लिखती है-

बहुत कुछ कह जाती है कजरारी आँखे
काले बुरके से झाँकती सपनीली आँखे

कभी रेगिस्तान की वीरानगी सी छाती
कभी उन आँखो मे गहरी खामोशी होती


http://meenakshi-meenu.blogspot.com/2007/10/blog-post_14.html


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हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-4

हिन्दी ब्लाग जगत की वे बेहतरीन रचनाएँ जिन्होने मुझे प्रभावित किया-4
- पंकज अवधिया

क्या आप मस्तिष्क की चोटों पर वेब साइट बनाने में भागीदारी करेंगे?

19 मार्च, 2007 को माननीय ज्ञानदत्त पांडेय जी के मानसिक हलचल ब्लाग की यह प्रस्तुति एक भारी मानसिक पीडा झेल रहे पिता की प्रस्तुति है जो सक्षम होने के बाद भी अपने पुत्र के लिये ज्यादा कुछ नही कर पा रहा है। ज्ञान जी ऊपर से जितने खुश दिखे पर भीतर से वे शांत नही है। पूरा हिन्दी ब्लाग परिवार सदा ही उनके साथ है। इसी ब्लाग परिवार के साथ इस प्रस्तुति के माध्यम से वे अपना दर्द बाँटते है और सहयोग की अपील करते है।

इस प्रस्तुति मे वे लिखते है-

“मैं ब्रेन-इन्जरी के एक भीषण मामले का सीधा गवाह रहा हूं. मेरा परिवार उस दुर्घटना की त्रासदी सन २००० से झेलता आ रहा है.”

“बहुत समय से मस्तिष्क की चोटों के मामलों पर इन्टर्नेट पर सामग्री उपलब्ध कराने का विचार मेरे मन में है. सिर में चोट लगने को भारत में वह गंभीरता नहीं दी जाती जो दी जानी चाहिये. कई मामलों में तो इसे पागलपन और ओझाई का मामला भी मान लिया जाता है. चिकित्सा क्षेत्र में भी सही सलाह नहीं मिलती. निमहन्स (National Institute of Mental Health and Neurosciences, Bangalore) में एक केस में तो मैने पाया था कि बिहार के एक सज्जन बहुत समय तक तो आंख का इलाज करा रहे थे और नेत्र-चिकित्सक ने यह सलाह ही नहीं दी कि मामला ब्रेन इन्जरी का हो सकता है. जब वे निमहन्स पंहुचे थे तो केस काफी बिगड़ चुका था...”

http://halchal.gyandutt.com/2007/03/blog-post_19.html


भूमिका: हिन्दी ब्लाग परिवार मे शामिल होने के बाद मैने अनगिनत चिठ्ठे पढे और इनमे प्रकाशित विचारो/लेखो/निबन्धो/कहानियो ने मेरे जीवन को बहुत प्रभावित किया। यह मेरा कर्तव्य है कि मै फिर इन खूबसूरत मोतियो को आपके सामने प्रस्तुत करुँ ताकि आप हिन्दी ब्लागरो के अविस्मरणीय योगदान को एक बार फिर से जान सके।