Tuesday, October 2, 2007

अरे कोई तो मुझे बचा लो

अरे कोई तो मुझे बचा लो

सदियो से तुम्हे ह्रदय रोगो से

बचाया

जब चिंतित दिखे

चैन की नीन्द सुलाया


फिर भी कर रहे हो

काम यह गन्दा

अरे कोई तो मुझे बचा लो

मै हूँ सर्पगन्धा


असंख्य थे हम कभी

वनो मे

पर उखाडकर बेचा हमे

मनो मे


दूसरो का जीवन जो छीन ले

भला यह कैसा है धन्धा

अरे कोई तो मुझे बचा लो

मै हूँ सर्पगन्धा


सरकार ने प्रतिबन्ध लगा

कुछ राहत पहुँचाई

पर फिर भी मै बिकती हूँ

यह है रिश्वतखोरो की बेहयाई


हम मिट गये धरती से तो सोच तेरा क्या होगा

मत बन लालच मे अन्धा

अरे कोई तो मुझे बचा लो

मै हूँ सर्पगन्धा

पंकज अवधिया दर्द हिन्दुस्तानी

(c) सर्वाधिकार सुरक्षित

सर्पगन्धा जग-प्रसिध्द औषधीय वनस्पति है जो आधुनिक और प्राचीन सभी चिकित्सा पध्दतियो मे प्रयोग होती है। पहले यह भारतीय वनो मे प्रचुरता से उगती थी पर अविवेकपूर्ण दोहन से अब इसका अस्तित्व खतरे मे है। प्रतिबन्ध के बावजूद यह बाजार मे खुलेआम बिकती है। विशेषज्ञ तो इस तथ्य को अच्छे से जानते है पर आम लोगो तक इस बात को पहुँचाने के लिये मैने कविता का माध्यम चुना है।

4 comments:

Udan Tashtari said...

आम जन तक बात पहुँचाने के लिये बहुत बढ़िया माध्यम चुना है, बधाई.

Reetesh Gupta said...

बहुत सुंदर तरीके से आपने अपनी कही है ...बधाई

Gyan Dutt Pandey said...

वाह, आपने तरीका बहुत अच्छा चुना. पहले भूलन और अब सर्पगन्धा. ये नाम अब याद रहेंगे.

Sanjeet Tripathi said...

कविताओं के माध्यम से जड़ी बूटी और वनस्पतियों का आम जन से परिचय करवाने के लिए सही तरीका आजमा रहे हैं आप्।