Wednesday, October 24, 2007

टिप्पणी कूट : टिप्पणी करने का अनोखा (?) औजार

मुझे याद आता है पहले तार (टेलीग्राम) करते समय तारघर मे सन्देशो की सूची लगी होती थी। आपको केवल कोड या कूट लिखना होता था और पूरा सन्देश चला जाता था। हिन्दी चिठ्ठाकारो की संख्या जिस तेजी से बढ रही है उससे थोडे समय बाद ज्यादा से ज्यादा टिप्पणी करना दुष्कर हो जायेगा।

पूरा पढने के लिये इस लिंक पर जाये

http://pratikriyaa.blogspot.com/2007/10/blog-post_24.html

7 comments:

आलोक said...

पसंद आए यह कूट! आपके लिए #२!

वैसे आप शायद संदेश के बजाय स्रदेश लिख गए हैं। कृपया ठीक कर लें।

आलोक

Dard Hindustani (पंकज अवधिया) said...
This comment has been removed by the author.
Dard Hindustani (पंकज अवधिया) said...

टिप्पणी के लिये धन्यवाद। आप शायद एक्सप्लोरर मे पढ रहे है। फायर फाँक्स मे तो ठीक दिख रहा है। सन्देश ही लिखा है।

आलोक said...

आप सही कह रहे हैं, सन्देश ही है। यह पैंगो में त्रुटि है या फिर गार्गी मुद्रलिपि में, इसके फलस्वरूप लिनक्स पर फ़ायर्फ़ाक्स के जरिए ठीक नहीीं दिख रहा है।

आलोक said...

इस त्रुटि का विवरण

Udan Tashtari said...

नया तरीका है. कोशिश करके देखिये. जब स्टैब्लिश हो जायें तब फिर इसी तरह पोस्ट लिखने का भी तरीका इजाद किया जायेगा. :)

जैसे कि:

१ आपका पत्र मिला ३, २.
५, ६.


१५

पोस्ट पूरी. अब टिपियाओ.

हरिराम said...

मैं windows xp os तथा IE6 ब्राउजर में मंगल फोंट का उपयोग करता हूँ, इसमें तो "सन्देश" बिल्कुल सही प्रकट हो रहा है।

लिनक्स में पांगो के नए वर्सन में इसे सुधार लिया गया है। गार्गी फोंट के VALIDATION की जरूरत है।