Thursday, March 20, 2008

शराब इस बार फिर तुम होली मनाना

इस बार फिर बोतल से निकलकर

आम लोगो के तन-मन मे घुस जाना

उनसे अपशब्द कहलवाना

शराब इस बार फिर तुम होली मनाना


परेशान है हर शख्स मेरे देश का

मुश्किल है उसके लिये सच कह पाना

पीकर तुम्हे वह सब कुछ है कहता

मिल जाता उसे बहाना


सबकी ही नही अपनी नजरो मे भी उसे गिराना

शराब इस बार फिर तुम होली मनाना


जानते है सब, कैसे करती हो

तुम बर्बाद

हम ही है जिनके बल पर हो

तुम आबाद


मनुष्य़ॉ से सीखे जग, अपने पैरो मे कुल्हाडी चलाना

इस बार फिर बोतल से निकलकर

आम लोगो के तन-मन मे घुस जाना

उनसे अपशब्द कहलवाना

शराब इस बार फिर तुम होली मनाना

पंकज अवधिया दर्द हिन्दुस्तानी

© सर्वाधिकार सुरक्षित

4 comments:

रवीन्द्र प्रभात said...

बढिया है ....! होली की शुभकामनाएं !

swati said...

alag alag sa andaaz hai kavita ka,likhte rahe

Gyandutt Pandey said...

होली के बहाने सन्देश। बहुत अच्छा।
होली मुबारक।

शोभा said...

सुन्दर रचना। होली मुबारक।